Tuesday, May 31, 2016



द्याखौ इन का भेस बनावाहाय दैया!

पंकज शुक्ल 

द्याखौ इन का भेस बनावा, हाय दैया,
तबहूं सबते च्वाख चरित्तुर? हाय दैया।

जागैं सबते बाद म घर मा, हाय दैया,
खाए क चाही रोज चूरमा, हाय दैया
घर मा फाका, घूमैं बन मा, हाय दैया,
अइसा कैसा न्वाख चरित्तुर, हाय दैया।

सेंदुर प्वाछै, बार बिछाए, हाय दैया,
बिछुआ, चोटी सब बिसराए, हाय दैया,
गांव कि गैया, सहर बिलैया, हाय दैया,
ई है सबते ध्वाख चरित्तुर, हाय दैया।



द्याखौ इन का भेस बनावा, हाय दैया,
जहां द्याखौ तहां पोज बनावा, हाय दैया,
घर मा झगड़ा, बाहर लफड़ा, हाय दैया,
तबहूं सबते च्वाख चरित्तुर? हाय दैया।

रहैं बिलाए बिना बताए, हाय दैया,
भूल नमस्ते करैं है हाए, हाय दैया,
सगरे लच्छन दिहें दिखाए, हाय दैया,
अब जाना हम त्रिया चरित्तुर, हाय दैया।

सहर सहर मा सौहर कीन्हे, हाय दैया,
वार करैं हैं पीठि म छुपिकै, हाय दैया,
पालिटिक्स पे करै पीएचकै, हाय दैया
जरि के होई राख चरित्तुर, हाय दैया।

द्याखौ इन का भेस बनावा, हाय दैया,
तबहूं सबते च्वाख चरित्तुर? हाय दैया।

© पंशु 31052016

2 comments:

vB said...

बहुतै सुन्दर प्रभु। कहाँ रहेओ एतने दिन से, पूरे पांच साल बाद परगट भये हउ अब एतना लम्बा गोता न मारेऊ भाई

Pankaj Shukla said...

हां.. वहिके खातिर माफी। अब ह्यानै रहा जाई।